रेस्टोरेंट मालिक की जेब में फटा चाइनीज फोन,
मचा हड़कंप
इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिला में फोन फटने का एक मामला सामने आया है।
थाना बसरेहर क्षेत्र में ये चाइनीज मेड फोन एक रेस्टोरेंट मालिक
की जेब में ही फट गया। मोबाइल कंपनी ओप्पो
एन्ड्रायड फोन की गुणवत्ता के बारें में बड़ी-
बड़ी डींगे मारती है। वहीं युवक
की जेब में रखे एक ओप्पो मोबाइल के ब्लास्ट होनें पर
उसकी जान जोखिम में पड़ गई।
एक रेस्टोरेंट में जब मालिक अपने ग्राहकों को डील कर रहा था
उसी वक्त रेस्टोरेंट मालिक हर्षित अवस्थी की
जेब में रखा ओप्पो कंपनी का एन्ड्रायड मोबाइल फोन ब्लास्ट हो गया।
जिससे रेस्टोरेंट मालिक गंभीर रूप से जख्मी हो गया है।
रेस्टोरेंट में मौजूद ग्राहकों ने आनन-फानन में युवक को अस्पताल में
भर्ती कराया।
वहीं इस घटना से पूरे गांव में हड़कंप मच गया है और मोबाइल
उपभोक्ताओं में ओप्पों कंपनी के मोबाइल को लेकर भय का माहौल पैदा
हो गया है। घटना के दौरान रेस्टोरेंट में मौजूद एक ग्राहक ने बताया कि हम रेस्टोरेंट
में नाश्ता करने आए थे तो अचानक रेस्टोरेंट में धमाका सुनाई पड़ा, जब देखा गया तो
रेस्टोरेंट मालिक के शरीर से धुंआ निकलता दिखा। धीरे-
धीरे बात समझ में आई और युवक को अस्पताल ले जाने में लोगों ने
मदद की।
चीन के साथ डोकलाम विवाद का असर अब बाजार पर भी दिखने लगा है। राखी का सामान बेचने वाले व्यापारियों का कहना है कि मार्केट में चीन के उत्पादों की मांग में भारी कमी देखने को मिल रही है। व्यापारियों का मानना है कि शायद जनभावना के कारण या फिर देशभक्ति की वजह से चीनी राखियां इस साल बाजार से गायब हैं। भारत में बनी राखियों से बाजार सजा हुआ है और उनकी ही अच्छी बिक्री भी हो रही है।
रक्षाबंधन इस साल 7 अगस्त को है। सोशलमीडिया पर चीन के उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम चल रही है और इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है। राखी के सामान में चीन के उत्पाद नदारद नजर आ रहे हैं। शाहगंज के राखी विक्रेता मुकेश ललवानी कहते हैं, 'इस साल खुद रक्षाबंधन के सामानों की बिक्री करने वाले दुकानदारों ने बड़ी संख्या में चीन के उत्पादों के बहिष्कार का फैसला किया है। चीन हमारे पैसों का प्रयोग हमें ही धमकाने के लिए कर रहा है। हम उन्हें पैसे कमाने का मौका क्यों दें?'
ललवानी ने बताया, 'इस बार हमारे पास सिर्फ भारत में बनी राखियां ही हैं। ग्राहक भी उनकी ही डिमांड करते हैं। यह सही है कि भारत में बने उत्पादों की लागत अधिक होने के कारण उन पर कम मुनाफा मिलता है, लेकिन फिर हम सोचते हैं कि हिंदुस्तानी उत्पादों को बेचने पर पैसा देश में ही रहेगा।'
कुछ इसी तरह की भावना ग्राहकों की भी है। सुनीता सिंह कहती हैं, 'सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप में भी चीनी उत्पादों के बहिष्कार के मेसेज मिलते हैं। मैंने फैसला किया है कि हम किसी तरह के चीनी उत्पादों का प्रयोग नहीं करेंगे।'
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