जो केस लगाए गए हैं ,
सारे केस वापस लो । फायरिंग करने वाले पुलिस वाले तुरन्त निलंबित हों । परिजनों को 1 करोड़ का मुआवजा व सरकारी नौकरी दो ।
हुजूर कहिये तो एक-दो पेट्रोल पंप , तीन-चार दुकानें और पांच-छः 3-BHK फ्लेट भी दिलवा दें । आप तो बस आर्डर कीजिये , हम सेक्युलरिज्म के पुरोधा सब सम्भाल लेंगे ।
आखिर आपके चश्मे चराग ने इस देश के लिए जान दी है । पाकिस्तान से युद्ध लड़ते हुए गोली खाई है , इसलिए इतना तो बनता है बॉस ।
अच्छा , भीड़ के खिलाफ मुकद्दमें वापिस लिए जाएं ? समझो ले लिए ।
ओह , फायरिंग करने वाले पुलिसिये भी निलंबित हों ? चिंता न करें , हो जाएंगे । आखिर हिम्मत कैसे हुई उनकी शांतिपूर्वक दंगा-फसाद करने वाली कौम पर गोलियां चलाने की ।
दंगा ही तो कर रहे थे , करने देते । आगजनी , तोड़फोड़ कर रहे थे , करने देते । पुलिस वालों को पीट रहे थे , पीटने देते । क्या गलत कर रहे थे ?
इन पुलिस वालों को देश की गंगा-जमुनी तहजीब के बारे में नहीं पता है क्या ? जब अमन और शांति पसन्द लोग दंगा-फसाद कर रहे हों तो गोली नहीं चलाने का ? गोली नहीं कुछ भी नहीं करने का । चुपचाप हाथ बांध के तमाशा देखने का जैसे बंगाल पुलिस देखती है ।
सीखो कुछ बंगाल पुलिस से ।
ये जयपुर पुलिस को तो कुछ भी नहीं आता इसलिए इनको निलंबित जरूर किया जाना चाहिए ।
हुंह बड़े आये सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करने वाले । मुझे तो लगता है गोली चलाने वाले जरूर संघी होंगे । इसकी भी जांच की जाए ।
और हां मीडिया वालों , ये "भीड़" लिखना बन्द करो पहले तो । ये कोई "भीड़" नहीं थी ।
भीड़ तो सिर्फ गौ रक्षको की होती है जो दादरी , अलवर जैसी जगहों पर जुटती है । भीड़ साम्प्रदायिक होती है । ये तो शांति और अमनपसन्द लोगों के टोले थे टोले , जो समाज में भाईचारे का पैगाम देने निकले थे ।
अब पुलिस वालों ने ही गलत समझ लिया तो इसमें इन टोलों का क्या दोष ?
इसलिए सभी तीनों मांगों को तुरन्त माना जाए । तभी देश में गंगा-जमुनी तहजीब और सेक्युलरिज्म कायम रहा सकता है ।
मैं तो कहता हूँ कि एक चौथी मांग और रखनी चाहिए । जन्नतनशीं मरहूम जनाब आदिल खान साहब को सरकार से शहीद-ए-कौम का दर्जा भी दिलवाना चाहिए ।
पत्थर फेंकते हुए या आग लगाते हुए या फिर पुलिस को पीटते हुए उनकी एक मूर्ति चौराहे पर लगवानी चाहिए ताकि कौम की आने वाली पीढियां उनसे प्रेरणा ले सके और यह जान सके कि आदिल साहब ने कौम के लिए क्या कुर्बानी दी है ?
आदिल खान अमर रहें ।
सेक्युलरिज्म जिंदाबाद ।
गंगा जमुनी तहजीब जिंदाबाद ।
हुजूर कहिये तो एक-दो पेट्रोल पंप , तीन-चार दुकानें और पांच-छः 3-BHK फ्लेट भी दिलवा दें । आप तो बस आर्डर कीजिये , हम सेक्युलरिज्म के पुरोधा सब सम्भाल लेंगे ।
आखिर आपके चश्मे चराग ने इस देश के लिए जान दी है । पाकिस्तान से युद्ध लड़ते हुए गोली खाई है , इसलिए इतना तो बनता है बॉस ।
अच्छा , भीड़ के खिलाफ मुकद्दमें वापिस लिए जाएं ? समझो ले लिए ।
ओह , फायरिंग करने वाले पुलिसिये भी निलंबित हों ? चिंता न करें , हो जाएंगे । आखिर हिम्मत कैसे हुई उनकी शांतिपूर्वक दंगा-फसाद करने वाली कौम पर गोलियां चलाने की ।
दंगा ही तो कर रहे थे , करने देते । आगजनी , तोड़फोड़ कर रहे थे , करने देते । पुलिस वालों को पीट रहे थे , पीटने देते । क्या गलत कर रहे थे ?
इन पुलिस वालों को देश की गंगा-जमुनी तहजीब के बारे में नहीं पता है क्या ? जब अमन और शांति पसन्द लोग दंगा-फसाद कर रहे हों तो गोली नहीं चलाने का ? गोली नहीं कुछ भी नहीं करने का । चुपचाप हाथ बांध के तमाशा देखने का जैसे बंगाल पुलिस देखती है ।
सीखो कुछ बंगाल पुलिस से ।
ये जयपुर पुलिस को तो कुछ भी नहीं आता इसलिए इनको निलंबित जरूर किया जाना चाहिए ।
हुंह बड़े आये सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करने वाले । मुझे तो लगता है गोली चलाने वाले जरूर संघी होंगे । इसकी भी जांच की जाए ।
और हां मीडिया वालों , ये "भीड़" लिखना बन्द करो पहले तो । ये कोई "भीड़" नहीं थी ।
भीड़ तो सिर्फ गौ रक्षको की होती है जो दादरी , अलवर जैसी जगहों पर जुटती है । भीड़ साम्प्रदायिक होती है । ये तो शांति और अमनपसन्द लोगों के टोले थे टोले , जो समाज में भाईचारे का पैगाम देने निकले थे ।
अब पुलिस वालों ने ही गलत समझ लिया तो इसमें इन टोलों का क्या दोष ?
इसलिए सभी तीनों मांगों को तुरन्त माना जाए । तभी देश में गंगा-जमुनी तहजीब और सेक्युलरिज्म कायम रहा सकता है ।
मैं तो कहता हूँ कि एक चौथी मांग और रखनी चाहिए । जन्नतनशीं मरहूम जनाब आदिल खान साहब को सरकार से शहीद-ए-कौम का दर्जा भी दिलवाना चाहिए ।
पत्थर फेंकते हुए या आग लगाते हुए या फिर पुलिस को पीटते हुए उनकी एक मूर्ति चौराहे पर लगवानी चाहिए ताकि कौम की आने वाली पीढियां उनसे प्रेरणा ले सके और यह जान सके कि आदिल साहब ने कौम के लिए क्या कुर्बानी दी है ?
आदिल खान अमर रहें ।
सेक्युलरिज्म जिंदाबाद ।
गंगा जमुनी तहजीब जिंदाबाद ।



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